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ए जिन्दगी

लहरों को खामोश देखकर यह न समझना कि समंदर में रवानी नही हैं, हम जब भी उठेंगे तूफ़ान बन कर उठेंगे, बस उठने की अभी ठानी नही हैं.

ये जो है जिन्दगी

ज़िंदगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र आखिरी सांस तक बेक़रार आदमी ! हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी!!

असली हीरो

कोरोना ने एक बात सीखा दी देश के असली हीरो बॉलीवुड वाले या क्रिकेटर नहीं बल्कि डॉक्टर, पुलिस और सफाई कर्मचारी है ।